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झारखंड के सरकारी स्कूलों में नया अध्याय: NCERT सिलेबस में जुड़ेगा 20% स्थानीय कंटेंट

 झारखंड के सरकारी स्कूलों में नया अध्याय: NCERT सिलेबस में जुड़ेगा 20% स्थानीय कंटेंट



अगले शैक्षणिक सत्र से झारखंड के सरकारी स्कूलों में NCERT पाठ्यक्रम के साथ 20 प्रतिशत स्थानीय कंटेंट पढ़ाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को उनकी संस्कृति इतिहास और पर्यावरण से जोड़ना है। झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) द्वारा तैयार किए जा रहे इस पाठ्यक्रम में स्थानीय भाषा लोकगीत औषधीय पौधों और भूगोल को शामिल किया जा रहा है।

अगले शैक्षणिक सत्र से सरकारी स्कूलों में एनईपी 2020 लागू करने की तैयारी। (फाइल फोटो)


जमशेदपुर। झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 के तहत अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को अब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के साथ-साथ 20% स्थानीय कंटेंट भी पढ़ाया जाएगा। यह पहल बच्चों को उनकी अपनी संस्कृति, इतिहास, भाषा और पर्यावरण से जोड़ने के लिए की गई है। जिससे शिक्षा अधिक प्रासंगिक और रोचक बन सके।


इस बदलाव के लिए झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT) तेजी से काम कर रहा है और रांची में शिक्षकों की एक विशेष टीम इस स्थानीय सामग्री को तैयार करने में जुटी है। अब तक लगभग 70% काम पूरा हो चुका है।


शिक्षा में स्थानीय रंग: क्या-क्या है खास?

इस नए पाठ्यक्रम में छात्रों को अपने परिवेश के बारे में गहराई से जानने का मौका मिलेगा। साहित्य, हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे विषयों में स्थानीय स्तर के उदाहरण और सामग्री शामिल की जा रही है। हिंदी में स्थानीय बोलियों के शब्दों को ब्रैकेट में शामिल कर उनकी समझ विकसित की जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय बाल गीतों को भी पाठ्यक्रम में स्थान दिया जा रहा है।


विज्ञान विषय में झारखंड की विशिष्ट जैव विविधता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें राज्य में पाए जाने वाले औषधीय पौधे जैसे रूगड़ा, करम व अन्य स्थानीय वनस्पतियों को पाठ्यपुस्तकों में जोड़ा जा रहा है।

दलमा के जंगलों में पाए जाने वाले विशिष्ट वृक्षों, हाथियों और अन्य जीव-जंतुओं पर भी विशेष जानकारी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, झारखंड के जलप्रपातों, जलस्रोतों और भूगोल से जुड़े विषयों को भी छात्रों के अध्ययन का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे छात्र न केवल अपने परिवेश को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, बल्कि अपने क्षेत्र की परंपराओं और उपलब्धियों पर गर्व भी महसूस करेंगे।



सर्वांगीण विकास की दिशा में एक कदम

इस पहल का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। जब बच्चे अपने आस-पास की चीजों और कहानियों को पाठ्यक्रम में देखते हैं, तो वे विषय को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। उनके अंदर अपने क्षेत्र की परंपराओं और उपलब्धियों के प्रति सम्मान और गर्व की भावना भी पैदा होगी। जेसीईआरटी के उप निदेशक प्रदीप चौबे पाठ्यक्रमों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं।




कार्य में लगे शिक्षकों को प्रोत्साहित करते हुए मिशन मोड में योजना को पूरा करने का निर्देश दे रहे हैं। यह कदम झारखंड के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा और छात्रों के भविष्य को नई दिशा देगा।

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