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पंचायत सचिवों की हर कभी हड़ताल अब नहीं होगी बर्दाश्त, Direct होंगे बर्खास्त

भोपाल। हर कभी हड़ताल पर चले जाने वाले 22 हजार 824 ग्राम पंचायत सचिवों पर राज्य शासन ने अब नकेल कसना शुरू कर दी है। अब यदि वे कर्तव्य से लगातार अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहते हैं तो उन्हें दंडित किया जाएगा।


इसके तहत उन्हें सेवा से बर्खास्त भी किया जा सकेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने 24 साल पहले बने मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के तहत 6 साल पहले बने मप्र पंचायत सेवा ग्राम पंचायत सचिव भर्ती और सेवा शर्तें नियम 2011 में संशोधन कर उसे प्रभावशील कर दिया है। 

गौरतलब है कि नए प्रावधानों के मुताबिक अब ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ दो दशाओं में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पहली ग्राम पंचायत सचिव को सेवा से खुद ही अलग माना जाएगा यदि उसे किसी न्यायालय ने नैतिक अधमता के किसी अपराध के लिए दोषी माना है। दूसरा ग्राम पंचायत सचिव को 6 मामलों में 7 दिन का कारण बताओ नोटिस तथा सुनवाई का अवसर दिए जाने के बाद दंडित किया जाए।

एक वेबसाइट कि खबरों के मुताबिक अब जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी ग्राम पंचायत सचिवों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए सक्षम प्राधिकारी होगा। दंड अधिरोपित करने वाले वाले आदेश की दिनांक से 15 दिन के अंदर आयुक्त पंचायत राज संचालनालय के सामने अपील कर सकेगा।

ये 4 दंड मिलेंगे
ग्राम पंचायत सचिवों को अब छह मामले में चार प्रकार के दंड दिए जा सकेंगे। जिसमें सेवा समाप्त करना, वेतनवृध्दि रोकना, पंचायत/राज्य सरकार को हुई हानि की राशि की वसूली करना और अनाधिकृत अनुपस्थिति की अवधि को अकार्य दिवस अथवा अवैतनिक घोषित करना शामिल है। पंचायती राज संचालनालय आयुक्त शमीमउद्दीन का कहना है कि ग्राम पंचायत सचिवों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के नए नियम प्रभावशील किए गए हैं। अब गड़बड़ी करने पर इन्हीं नए नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। 

कौन से हैं 6 मामले ?
1. अमर्यादित आचरण करने की दशा में। 
2. गंभीर अनुशासहीनता के आचरण की दशा में।
3. कर्तव्य से लगातार अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने की दशा में। 
4.वित्तीय अनियमितता करने, गबन करने या पंचायत राज संस्था या सरकार को वित्तीय हानि पहुंचाने पर।
5. मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसे दंडित किया गया हो अथवा उसके खिलाफ किसी राशि की वसूली का आदेश पारित किया गया हो। 
6. ग्राम सभा ने इस आशय का प्रस्ताव पास होने की दशा में कि सचिव अपने कर्तव्यों के पालन में लापरवाही बरतता है या वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन उचित तरीके से नहीं करता हो। 


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